भारतीय शेयर बाज़ार की लगातार उतार-चढ़ाव वाली स्थिति ने रिटेल निवेशकों के सीधे इक्विटी निवेश को भारी झटका दिया है। वर्ष 2025 में अब तक रिटेल निवेशकों का शुद्ध प्रवाह केवल ₹13,273 करोड़ रहा है, जबकि जनवरी से सितंबर 2024 के बीच यह आंकड़ा ₹1.1 लाख करोड़ था। इस प्रकार एक साल में लगभग 90% की गिरावट दर्ज हुई है।
मार्च 2025 में रिटेल निवेशकों ने ₹14,325 करोड़ का शुद्ध बिकवाली की थी, जो 2016 के बाद उनका सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो था। पिछले नौ महीनों में से पाँच महीनों में वे शुद्ध विक्रेता रहे हैं। हालाँकि जुलाई और अगस्त में कुछ खरीदारी की झलक दिखी, लेकिन सितंबर में वे फिर से बिकवाली की ओर लौटे।
दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियाँ और पेंशन फंड्स जैसे घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) बाज़ार में मज़बूत प्रवाह बनाए हुए हैं। SIP, बीमा प्रीमियम और रिटायरमेंट योजनाओं से जुटे फंड ने छोटे निवेशकों की घटती पूंजी की भरपाई की है। विशेषज्ञों का कहना है कि डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट चुनौतीपूर्ण बनते देख रिटेल निवेशक “खरीदो और रखो” की पारंपरिक रणनीति छोड़कर औपचारिक निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।