भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच यदि व्यापार समझौता होता है तो अमेरिका को होने वाले भारत के कुल निर्यात का लगभग 85% हिस्सा यूरोप की ओर मुड़ सकता है। हालिया एक अध्ययन के अनुसार यूरोप में भारतीय उत्पादों की व्यापक मांग है, जो अमेरिकी टैरिफ झटके से बचाने के लिए एक वैकल्पिक बाजार के रूप में उभर सकती है।
साल 2024 में भारत ने यूरोपीय संघ को 77.50 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जबकि अमेरिका को 79.40 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था। अध्ययन के अनुसार, यदि व्यापार समझौता लागू होता है तो अमेरिका के लिए होने वाले लगभग 67.20 अरब डॉलर के निर्यात को यूरोप की ओर मोड़ा जा सकता है। हालांकि, वास्तविक वृद्धि समझौते की शर्तों पर निर्भर करेगी।
हीरा क्षेत्र भारत के लिए यूरोप में बड़ी संभावना लेकर आता है। पिछले साल अमेरिका ने भारत से 4.82 अरब डॉलर के हीरे आयात किए थे, जबकि यूरोप ने अपनी कुल 7.30 अरब डॉलर की आयात में से 1.70 अरब डॉलर के हीरे भारत से खरीदे थे। इससे स्पष्ट है कि यूरोपीय बाजार में भारतीय हीरों के लिए बड़ी गुंजाइश मौजूद है।
व्यापार समझौते में हीरों के अलावा स्मार्टफोन निर्यात के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। वर्तमान में अन्य देशों से यूरोप में अरबों डॉलर के स्मार्टफोन निर्यात हो रहे हैं, जबकि भारत से यह आंकड़ा तुलनात्मक रूप से बहुत कम है।
फिलहाल यूरोप के साथ समझौता तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि यूके के साथ हुआ समझौता अभी संसदीय मंजूरी की प्रतीक्षा में है। दूसरी ओर, अमेरिका यूरोप से भारत के सामान पर टैरिफ लगाने का दबाव बना रहा है। इस बीच, भारत और अमेरिका के बीच भी व्यापार समझौते के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रति अपने रुख में नरमी दिखाई है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके बयान पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।