स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) द्वारा हाल ही में 25,000 करोड़ रुपये जुटाने की घटना को छोड़ दें, तो इस साल क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए धन जुटाने की गति पिछले वर्ष की तुलना में काफी धीमी रही है।
अगस्त 2025 तक कुल 27 कंपनियों ने क्यूआईपी के माध्यम से 57,254 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में 58 कंपनियों ने मिलकर 64,924 करोड़ रुपये हासिल किए थे। यदि एसबीआई की बड़ी फंडरेज़िंग को अलग कर दें, तो इस वर्ष का स्तर पिछले साल की तुलना में आधे से भी कम रह जाता।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ मुद्दों और अन्य वैश्विक कारकों के चलते पूरे वर्ष बाजार में अस्थिरता बनी रही। हालांकि, हाल ही में जीएसटी में कटौती और त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ी खपत का असर जुलाई–सितंबर तिमाही के नतीजों में दिख सकता है। इससे कंपनियां दोबारा क्यूआईपी के जरिए बाजार में उतरने के लिए प्रेरित हो सकती हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि त्योहारों के मौसम के बाद और अधिक क्यूआईपी की घोषणाएं हो सकती हैं। उल्लेखनीय है कि क्यूआईपी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कंपनियां बाजार भाव की तुलना में कम कीमत पर चुनिंदा निवेशकों को नए शेयर जारी कर सकती हैं। फॉलो-ऑन फंडरेज़िंग के लिए यह एक तेज और कम खर्चीला विकल्प होने के कारण कंपनियों की पहली पसंद बनी रहती है।