महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विदर्भ क्षेत्र के प्राकृतिक आपदा एवं सूखे से प्रभावित किसानों के प्रति गहरी संवेदनशीलता व्यक्त करते हुए एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। राज्य के उप मुख्यमंत्री बिना किसी पूर्व निर्धारित औपचारिक कार्यक्रम के अचानक सीधे किसानों के खेतों में पहुंच गए। उन्होंने खेतों के धरातल पर जाकर बेमौसम वर्षा, कीटों के प्रकोप तथा सूखे के कारण नष्ट हुई सोयाबीन एवं अन्य फसलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने फसल क्षति का जायजा लेने के साथ-साथ दुखी और हताश किसानों से व्यक्तिगत रूप से संवाद स्थापित किया तथा उनके संकट को करीब से समझा।
खेतों की वर्तमान स्थिति और फसलों के व्यापक नुकसान को देखकर उप मुख्यमंत्री शिंदे ने उपस्थित किसानों को पूर्ण शासकीय सहायता का ठोस आश्वासन दिया। उन्होंने भावुक और संकटग्रस्त किसानों से संवाद करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य सरकार इस कठिन घड़ी में पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है। शिंदे ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में किसानों की दिवाली काली नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि त्योहारों के अवसर से पूर्व ही सभी प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और राहत राशि उनके खातों में पहुंचाने की प्रक्रिया को बिना किसी विलंब के पूरा किया जाए।
निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री शिंदे ने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों एवं कृषि विभाग के प्रतिनिधियों को त्वरित और पारदर्शी पंचनामा तैयार करने के कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षति का आकलन करने में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली या प्रशासनिक शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें प्रत्येक प्रभावित खेत का दौरा करें और बिना किसी जटिल कागजी प्रक्रिया के वास्तविक आंकड़े दर्ज करें, ताकि एक भी पीड़ित किसान शासकीय योजना और वित्तीय सहायता से वंचित न रहने पाए।
महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र इस समय सोयाबीन एवं कपास उत्पादक किसानों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। प्रतिकूल मौसम और वर्षा की अनियमितता के कारण फसलों को भारी क्षति पहुंची है, जिससे कृषक समुदाय अत्यंत निराश था। ऐसे समय में राज्य के शीर्ष नेतृत्व का स्वयं खेतों में उतरना और तत्काल वित्तीय राहत का आश्वासन देना किसानों के बीच एक बड़ा संबल बनकर उभरा है। राज्य सरकार की इस त्वरित पहल से प्रभावित किसानों में पुनः आशा की किरण जागी है और उन्हें आने वाले त्योहारों से पूर्व शासकीय सहायता मिलने की प्रबल संभावना बनी है।