एचएसबीसी ने भारतीय इक्विटी बाजार के दृष्टिकोण को न्यूट्रल से बदलकर ओवरवेट कर दिया है और अनुमान जताया है कि अगले डेढ़ साल में सेंसेक्स 96,000 के स्तर तक पहुँच सकता है। मौजूदा स्तर से सेंसेक्स में लगभग 13% से अधिक की तेजी संभव है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की सकारात्मक नीतियाँ, घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और ऊँचे मूल्यांकन के बावजूद भारत के लिए स्थिति अनुकूल बनी हुई है। एशिया के अन्य देशों की तुलना में भारतीय इक्विटीज ज्यादा स्थिर दिखाई दे रही हैं।
खास तौर पर ताइवान और कोरिया की तुलना में भारत मजबूत स्थिति में है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशक लगातार बाजार में खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बाजार को आवश्यक सहारा मिल रहा है। वर्ष 2025 में घरेलू संस्थानों की खरीद का आँकड़ा पिछले साल से भी अधिक रहा है। एचएसबीसी ने बताया कि चीन और हांगकांग के लिए ओवरवेट दृष्टिकोण बरकरार रखा गया है, जबकि कोरिया के लिए अंडरवेट रुख अपनाया गया है। मजबूत आर्थिक आधार, सुधारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और पूँजीगत व्यय आधारित विकास के कारण भारत वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है।