शेयर बाजार में बढ़ती अस्थिरता के कारण नए डीमेट खाते खोलने की गति धीमी हो गई है। 2025 के पहले नौ महीनों में नए डीमेट खातों की संख्या में लगभग 40% की कमी आई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2025 के दौरान कुल 2.18 करोड़ नए डीमेट खाते खोले गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 3.61 करोड़ खाते खोले गए थे। इस प्रकार, एक साल में लगभग 1.40 करोड़ खातों की गिरावट दर्ज की गई है। वर्तमान में देश में कुल डीमेट खातों की संख्या 20.70 करोड़ तक पहुँच गई है, जबकि 2021 में यह केवल 6.90 करोड़ थी, यानी पिछले चार वर्षों में तीन गुना वृद्धि हुई है।
सितंबर 2025 तक एनएसडीएल में 4.19 करोड़ और सीडीएसएल में 16.52 करोड़ खाते दर्ज हैं। लगातार बाजार की ऊँच-नीच के बीच मिडकैप और स्मॉलकैप सेक्टर में बड़े करेक्शन देखने को मिले, जिसके कारण रिटेल निवेशकों की उत्सुकता कम हुई है। सितंबर में केवल 24.60 लाख नए खाते खोले गए, जो मई के बाद का सबसे कम आंकड़ा है। अगस्त में 24.90 लाख और जुलाई में 29.80 लाख खाते खोले गए थे। डिपॉजिटरी डेटा के अनुसार, 2025 के पहले नौ महीनों में प्रत्येक महीने औसतन 24.20 लाख नए खाते जुड़ गए, जबकि पिछले साल यह औसत 40 लाख था।
इससे स्पष्ट होता है कि शेयर बाजार की अनिश्चितता ने नए निवेशकों के उत्साह को ठंडा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष के अंतिम तिमाही में नए पब्लिक इश्यू (IPO) की संख्या बढ़ने के कारण डीमेट खातों में फिर से वृद्धि देखने को मिल सकती है। वर्ष की शुरुआत में आए IPO ने निवेशकों को संतोषजनक रिटर्न नहीं दिया, जिसके कारण नए खाते खोलने में मंदी रही। साथ ही, वैश्विक इक्विटीज की तुलना में भारतीय इक्विटीज का प्रदर्शन इस साल कमजोर रहा है, जिससे कई नए निवेशक बाजार में प्रवेश करने से दूर रहे।