वर्तमान वित्त वर्ष में निजी कंपनियां पूंजी खर्च बढ़ाने में पीछे रह रही हैं। वैश्विक व्यापार की अनिश्चितताओं के कारण अधिकतर कंपनियां ‘रुको और देखो’ की नीति अपना रही हैं। इसी वजह से नए प्रोजेक्ट या क्षमता विस्तार की बड़ी घोषणाएं नहीं हो रही हैं। एसएंडपी ग्लोबल की एक रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल निजी निवेश की वृद्धि दर जीडीपी से कम है और कंपनियां बैंकों से नया लोन लेने की बजाय आंतरिक संसाधनों पर अधिक निर्भर हो रही हैं।
इस साल बैंकिंग क्रेडिट ग्रोथ 12–13% रहने का अनुमान है। हालांकि, लंबी अवधि का परिदृश्य सकारात्मक है। रिपोर्ट के मुताबिक अगले पाँच सालों में निजी कंपनियों से 800–850 अरब डॉलर तक के पूंजी खर्च की संभावना है। बड़ी कंपनियां फिलहाल सतर्क हैं, लेकिन आने वाले समय में निवेश का प्रवाह तेज़ी पकड़ने की उम्मीद है।