रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान में सुधार किया है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए देश की विकास दर को 6.50% से बढ़ाकर 6.90% कर दिया गया है। घरेलू मजबूत मांग को इस वृद्धि का मुख्य आधार माना जा रहा है। उपभोक्ताओं की बढ़ती आय और खर्च करने की प्रवृत्ति आर्थिक गति को और सहारा देगी।
हालांकि, आगामी वित्त वर्षों के लिए फिच ने कुछ सतर्क दृष्टिकोण अपनाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर 6.30% और 2027-28 के लिए 6.20% रहने का अनुमान लगाया गया है।
वैश्विक स्तर पर 2025 में आर्थिक विकास दर 2.40% रहने की संभावना है, जो पिछले वर्ष के 2.90% की तुलना में कमजोर है। भारत के अलावा, फिच ने चीन की विकास दर का अनुमान भी 4.20% से बढ़ाकर 4.70% किया है। यूरोजोन की विकास दर 0.80% से बढ़कर 1.10% और अमेरिका का अनुमान 1.50% से बढ़कर 1.60% किया गया है।
भारत से संबंधित फिच के अध्ययन में कहा गया है कि अमेरिका के टैरिफ चरणबद्ध घटेंगे, लेकिन व्यापार संबंधों में अनिश्चितता निवेश पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इसके बावजूद, जीएसटी सुधार और अच्छे मानसून के कारण उपभोग खर्च में वृद्धि तथा खाद्य मुद्रास्फीति में राहत देखने को मिलेगी। इसके अलावा, रिजर्व बैंक वर्ष के अंत तक रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है, ऐसी संभावना भी जताई गई है।