कम ब्याज दर के माहौल में बैंकिंग सेक्टर में ऋण की मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि जमा वृद्धि इसकी तुलना में धीमी बनी हुई है। इसके चलते आने वाले समय में बैंकों पर फंड जुटाने का दबाव बढ़ सकता है। आरबीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 28 नवंबर को समाप्त पखवाड़े में ऋण वृद्धि 11.42% रही, जबकि जमा वृद्धि 10.19% दर्ज की गई। यानी ऋण वृद्धि जमा से 1.23% अधिक रही। एक साल पहले इसी अवधि में ऋण और जमा दोनों की वृद्धि 10.58% के समान स्तर पर थी।
14 नवंबर को समाप्त पखवाड़े में भी ऋण वृद्धि 11.40% और जमा वृद्धि 10.20% रही, जिससे यह असमानता लगातार बढ़ती दिख रही है। फरवरी से अब तक आरबीआई ने रेपो रेट में कुल 1.25% की कटौती की है, जिससे लोन और जमा दोनों पर ब्याज दरें घटी हैं। बैंक जमा की तुलना में इक्विटी, डिबेंचर्स और सोना-चांदी जैसे विकल्पों में बेहतर रिटर्न मिलने से बचतकर्ता अन्य एसेट क्लास की ओर रुख कर रहे हैं। इससे जमा वृद्धि सुस्त पड़ी है, जबकि सस्ती लोन दरों से ऋण मांग बढ़ी है।
बढ़ती ऋण मांग को पूरा करने के लिए आरबीआई ने तरलता बढ़ाने के कदम भी उठाए हैं। ओपन मार्केट ऑपरेशन के जरिए ₹1 लाख करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद और 5 अरब डॉलर के तीन वर्षीय डॉलर-रुपया स्वैप की घोषणा की गई है। 28 नवंबर को बैंकिंग सिस्टम में कुल जमा ₹242.60 लाख करोड़ और कुल ऋण ₹195.30 लाख करोड़ रहा।