दिल्ली हाईकोर्ट में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को आजीवन कारावास की बजाय फांसी की सजा देने की मांग की है। यह याचिका वर्तमान में हाईकोर्ट में विचाराधीन है, जिसमें कई महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आए हैं.
यासीन मलिक को मई 2022 में टेरर फंडिंग और अन्य आतंकवादी गतिविधियों के अपराधों में दोषी ठहराते हुए ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
NIA ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी और अपने तर्क में कहा कि यासीन मलिक की करतूत “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” (अत्यंत दुष्कर) श्रेणी में आती हैं, अतः उसे मृत्युदंड दिया जाए.
ट्रायल कोर्ट ने NIA की मांग को खारिज करते हुए कहा था कि अपराध गंभीर हैं लेकिन मौत की सजा योग्य नहीं है.
दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जज अमित शर्मा ने व्यक्तिगत कारणों से खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। अब यह याचिका जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने आएगी और अगली सुनवाई 9 अगस्त को होगी.
2017 में NIA ने यासीन मलिक समेत कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ टेरर फंडिंग केस दर्ज किया था।
मलिक ने अधिकतर आरोप खुद स्वीकार किए थे। यूएपीए और आईपीसी की कई धाराओं में दोषी पाया गया था.
NIA का कहना है कि केवल ‘गुनाह कबूल करने’ के आधार पर मौत की सजा से बचाना आतंकवादियों के लिए छूट जैसा होगा, इसलिए सजा नीति को कठोर बनाना आवश्यक है.
यासीन मलिक ने हाईकोर्ट के समक्ष अपनी पैरवी खुद करने की इच्छा जताई, जिसे कोर्ट ने मंजूर किया और उसे दलीलें पेश करने के लिए तीन सप्ताह दिए.
यह मामला संवेदनशील है तथा अगली सुनवाई वर्चुअल माध्यम से 9 अगस्त तथा 19 सितंबर को प्रस्तावित है, जिसमें मलिक अपने पक्ष स्वयं रखेगा.
यासीन मलिक को आजीवन कारावास से फांसी देने की NIA की मांग

