भारत कच्चे तेल की मांग में चीन को पीछे छोड़ने की तैयारी कर रहा है। इस वर्ष भारत की कच्चे तेल की मांग चीन की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि रणनीतिक भंडारण को गणना में न लिया जाए तो भारत की वास्तविक मांग चीन से आगे निकल जाएगी। भारत में कच्चे तेल की खपत बढ़ने का प्रमुख कारण तेज़ी से हो रहा शहरीकरण, बढ़ती आय और जीवनशैली में सुधार है। इसके अलावा, निजी और व्यावसायिक वाहनों की बढ़ती संख्या भी तेल की मांग को बढ़ा रही है।
दूसरी ओर, चीन में कच्चे तेल की खपत धीमी हो गई है। वहां मांग में बढ़ोतरी मुख्य रूप से पेट्रोकेमिकल क्षेत्र तक सीमित है। वर्तमान में चीन अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के लिए रोजाना लगभग 2 लाख बैरल तेल का भंडारण कर रहा है। इस कदम से वैश्विक तेल कीमतों में कुछ संतुलन आया है और ओपेक को अपनी उत्पादन क्षमता फिर से शुरू करने का अवसर मिला है। हालांकि, लंबे समय में चीन इतना बड़ा भंडार इकट्ठा कर पाएगा या नहीं, यह चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि अतिरिक्त तेल को अवशोषित करना कठिन साबित होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले वर्ष वैश्विक कच्चे तेल की मांग में बड़ी छलांग देखने को मिले, ऐसा कोई ठोस कारण अभी नज़र नहीं आता। औसतन रोजाना केवल 1 मिलियन बैरल अतिरिक्त मांग संभव है, जो आपूर्ति की तुलना में पर्याप्त नहीं होगी। इसीलिए, इस वर्ष वैश्विक कच्चे तेल बाजार की दिशा मुख्य रूप से भारत की बढ़ती मांग और चीन की धीमी खपत के बीच के अंतर पर निर्भर करेगी। उत्पादक और निवेशक दोनों ही इस बदलाव पर बारीकी से नज़र बनाए हुए हैं।