भारत के स्वर्ण भंडार के प्रबंधन में रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) द्वारा एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया है। पहले बड़ी मात्रा में सोना विदेशी बैंकों में जमा रखा जाता था, लेकिन अब रिज़र्व बैंक के पास मौजूद कुल 880 टन स्वर्ण भंडार में से लगभग 65%, यानी 576 टन सोना, देश के भीतर ही संग्रहित किया गया है। चार साल पहले यह अनुपात केवल 30 से 32% के बीच था। सूत्रों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में विदेशों में जमा 64 टन सोना वापस भारत लाया गया है। वर्तमान में देश के स्वर्ण भंडार का कुल मूल्य लगभग 108 अरब डॉलर के आसपास है। रिज़र्व बैंक अपने स्वर्ण भंडार का कुछ हिस्सा बैंक ऑफ़ इंग्लैंड और बैंक ऑफ़ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) जैसी विदेशी संस्थाओं के पास जमा रखता है।
सितंबर 2025 के अंत तक देश में रखे गए 576 टन सोने की मात्रा अब तक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गई है। सितंबर 2022 तक यह हिस्सा मात्र 38 प्रतिशत था। विदेशों से अधिक सोना वापस लाने के कारण को रिज़र्व बैंक ने आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस के विदेशी भंडार को जब्त किए जाने के बाद कई देशों ने अपनी संपत्तियां अपने देश में रखने की नीति अपनाई है। इस संदर्भ में भारत भी अधिक सतर्कता के साथ कदम उठा रहा है। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी कई केंद्रीय बैंकों ने अपने स्वर्ण भंडार में वृद्धि की है। RBI ने भी वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और डॉलर पर निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से सोने की खरीद बढ़ाई है।