भारतीय कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य में हाल ही में एक दिलचस्प रुझान देखा गया है। एक ओर कंपनियों के नकद भंडार में कमी दर्ज की गई है, जबकि दूसरी ओर कर्ज का बोझ बढ़ा है। विश्लेषकों के अनुसार यह स्थिति कंपनियों द्वारा पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) बढ़ाने के मजबूत संकेत देती है। एक निजी अनुसंधान संस्था द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, बीएसई-500 इंडेक्स की 340 कंपनियों का नकद भंडार 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच 44,000 करोड़ रुपये घटकर 7.36 ट्रिलियन रुपये पर पहुँच गया है। 31 मार्च 2025 तक इन ही कंपनियों के पास 7.80 ट्रिलियन रुपये का नकद भंडार था। सर्वेक्षण संकेत देता है कि वर्तमान समय में देश में ब्याज दरें अपेक्षाकृत कम हैं और मुद्रास्फीति नियंत्रण में है, जिसके चलते निजी कंपनियाँ पूंजीगत खर्च बढ़ा रही हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 के पहले छह महीनों में कंपनियों ने कुल मिलाकर 34 ट्रिलियन रुपये का पूंजीगत व्यय किया है, जो वार्षिक आधार पर 22.40% की वृद्धि दर्शाता है। तीन वर्षों में पहली बार नकद भंडार में गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान कंपनियों का कुल कर्ज 2.04 ट्रिलियन रुपये बढ़कर 29.15 ट्रिलियन रुपये हो गया है, जो पिछले तीन वर्षों का सबसे उच्च स्तर है। रिपोर्ट के अनुसार, घटता नकद भंडार और बढ़ता कर्ज, दोनों मिलकर पूंजीगत व्यय के विस्तार के स्पष्ट संकेत दे रहे हैं। मांग में लगातार वृद्धि, सप्लाई चेन का सामान्यीकरण और वित्त की आसान उपलब्धता जैसे कारक पूंजीगत खर्च को गति दे रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि चालू वित्त वर्ष के शेष गालों में तथा वित्त वर्ष 2027 में भी पूंजीगत खर्च में वृद्धि जारी रहेगी।
भारत की आर्थिक वृद्धि दर वर्तमान में विश्व में सबसे तेज़ है, जो पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है। इसके अलावा, गार्टनर के हालिया विश्लेषण के अनुसार, भारत में 2026 में आईटी खर्च 10.6% बढ़कर 176.3 अरब डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है। क्लाउड और डिजिटल टेक्नोलॉजी का तेज़ी से अपनाना, तथा डेटा सेंटर और सॉफ्टवेयर पर बढ़ता निवेश इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। वर्तमान में देश में डेटा सेंटर क्षमता पर्याप्त नहीं है, जबकि बढ़ती एआई मांग नए अवसंरचना निर्माण के लिए बड़ी संभावनाएँ पैदा कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में डेटा सेंटर श्रेणी सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला आईटी क्षेत्र बन सकता है।