भारतीय शेयर बाजार में कोरोना के बाद देखने को मिली तेजी पिछले 12 महीनों में धीमी कमाई और बढ़ते वैश्विक व्यापार तनाव के बीच थम गई है। प्रमुख सूचकांक अपनी पिछली ऊँचाइयों से करीब 5% नीचे हैं, जबकि व्यक्तिगत शेयरों में उल्लेखनीय कमजोरी देखने को मिल रही है। बीएसई 500 इंडेक्स में शामिल 300 से अधिक शेयर इस समय अपने उच्चतम स्तर से 20% या उससे अधिक नीचे कारोबार कर रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि पिछले एक वर्ष में कंपनियों की कमाई में मजबूत वृद्धि न मिलने के कारण ऊँचे दाम को समर्थन देने में निवेशक हिचकिचा रहे हैं।
कोरोना के बाद सरकार ने सार्वजनिक पूंजी खर्च बढ़ाकर बुनियादी ढाँचे और औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया था। उपभोक्ताओं ने भी संचित बचत से खर्च में तेजी दिखाई थी। आईटी क्षेत्र की तेजी और भर्ती ने आय को बढ़ावा दिया, वहीं बैंकिंग और एनबीएफसी ने व्यक्तिगत ऋण और क्रेडिट कार्ड खर्च को पर्याप्त वित्तपोषण उपलब्ध कराया था। हालांकि, पिछले 12 महीनों में कंपनियों की कमाई में सीमित वृद्धि होने के कारण बाजार के ऊँचे मूल्यांकन को सही ठहराना कठिन हो गया है।
इसके साथ ही, अमेरिका के साथ व्यापार तनाव से निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है। मझोली और छोटी कंपनियों के लिए स्थिति और कठिन है, क्योंकि बढ़ती प्रतिस्पर्धा, मार्जिन पर दबाव और कारोबारी मॉडल की चुनौतियों के चलते उनकी आय और मुनाफे में गिरावट आई है। आने वाले महीनों में बाजार में तेजी फिर देखने को मिलेगी या नहीं, यह काफी हद तक हाल ही में किए गए जीएसटी कटौती से खपत में कितनी तेजी आती है, उस पर निर्भर करेगा।