अमेरिका द्वारा भारत के सामान पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद निर्यातकों पर पड़े दबाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले दिनों में मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने से बच सकती है और डॉलर के मुकाबले रुपये को कमजोर होने दे सकती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में कच्चे तेल की कीमतें कम हैं, ऐसे में RBI यह जोखिम उठाने को तैयार हो सकती है।
रुपये की कमजोरी निर्यातकों के लिए सीधे तौर पर फायदेमंद होती है क्योंकि डॉलर से होने वाली आमदनी के बदले उन्हें अधिक रुपये प्राप्त होते हैं। फिलहाल अमेरिका ने भारत की तुलना में एशिया के प्रतिद्वंद्वी देशों के सामान पर 20% से 40% तक का ही टैरिफ लगाया है। ऐसी प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए भारत को सब्सिडी, ब्याज दरों में राहत और मुद्रा समायोजन जैसे विकल्प तलाशने की आवश्यकता होगी।
सामान्य परिस्थितियों में RBI रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए हस्तक्षेप करती है, लेकिन मौजूदा हालात में RBI हस्तक्षेप से बच सकती है। अभी कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे है और खाद्य पदार्थों की कीमतें भी नियंत्रण में हैं, इसीलिए रुपये में कमजोरी से आयातित महंगाई बढ़ने का खतरा सीमित रहेगा, ऐसा बाजार सूत्रों का मानना है।