अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि विश्व के तेल और गैस के भंडार तेज़ी से घट रहे हैं। एजेंसी ने 15,000 से अधिक तेल-गैस क्षेत्रों के आँकड़े देखकर चेतावनी दी है कि यदि नए निवेश नहीं हुए तो आने वाले वर्षों में उत्पादन लगातार घटता जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, तेल-गैस उद्योग में होने वाला 90% निवेश केवल मौजूदा क्षेत्रों में प्राकृतिक गिरावट को रोकने के लिए इस्तेमाल होता है। यदि नई खोज और निवेश नहीं हुए तो हर साल तेल का उत्पादन 55 लाख बैरल प्रतिदिन और गैस का उत्पादन 270 अरब घन मीटर तक घट सकता है।
भारत के लिए यह बेहद चिंताजनक स्थिति है क्योंकि भारत अपनी ज़रूरत का 85% कच्चा तेल और 45% गैस आयात करता है। वैश्विक भंडार घटने से भारत में ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं और सप्लाई संकट पैदा हो सकता है। खासकर शेल और गहरे समुद्री भंडार में कमी से खतरा और बढ़ रहा है।
IEA ने भारत को सलाह दी है कि वह किसी एक देश पर अधिक निर्भर न रहे और घरेलू तेल-गैस खोज को प्रोत्साहन दे। साथ ही, ग्रीन हाइड्रोजन और बायोफ्यूल जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए। एजेंसी का अनुमान है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो 2030-2040 के दशक में तेल-गैस आपूर्ति में भारी कमी हो सकती है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों पर गहरा संकट आ सकता है।