मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती के दबाव में रुपया आज और कमजोर होकर नई ऐतिहासिक निचली सतह पर पहुंच गया। डॉलर के मुकाबले रुपया पिछले बंद भाव 90.43 के मुकाबले आज 90.55 पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह 90.51 तक मजबूत हुआ, लेकिन बाद में दबाव बढ़ने से दिन के उच्चतम स्तर पर 90.79 तक टूट गया और अंततः 90.76 पर बंद हुआ। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में कुल 33 पैसे की गिरावट दर्ज की गई, जो दिन के दौरान लगभग 0.36 प्रतिशत की कमजोरी को दर्शाती है। बाजार सूत्रों के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार समझौता वार्ताओं में देरी और घरेलू शेयर बाजार की कमजोरी के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा।
डॉलर के इनफ्लो में कमी और आउटफ्लो बढ़ने से मुद्रा बाजार में डॉलर मजबूत हुआ। इससे पहले 12 दिसंबर को रुपया 90.55 तक टूटा था, जबकि आज 90.79 के स्तर को छूकर नई निचली सतह दर्ज की गई। जानकारों के अनुसार 2025 के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 18 अरब डॉलर के शेयर बेच दिए हैं, जबकि दिसंबर महीने में लगभग 500 मिलियन डॉलर के बॉन्ड बिकवाली की भी चर्चा बाजार में है। भारत-यूरोप व्यापार समझौते में देरी और मैक्सिको द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने के फैसले का असर भी रुपये की कमजोरी में इजाफा कर रहा है।
वैश्विक बाजार में आज डॉलर इंडेक्स 98.32 से 98.48 के दायरे में रहा और अंत में करीब 98.37 पर देखा गया। अमेरिका के आने वाले महंगाई और रोजगार से जुड़े आंकड़ों पर भी बाजार की नजर बनी रही। जापान में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के सेंटिमेंट में सुधार और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना के चलते येन डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। ब्रिटेन और यूरोप में भी आगामी ब्याज दर घोषणाओं को लेकर बाजार सतर्क रहा। इस दौरान वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नरम रहीं। आज रुपये के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड 30 पैसे बढ़कर 121.33 पर पहुंच गया, जबकि यूरो 42 पैसे बढ़कर 106.51 पर रहा।
जापान की मुद्रा रुपये के मुकाबले 0.81 प्रतिशत और चीन की मुद्रा 0.46 प्रतिशत मजबूत हुई। मुंबई बाजार में कुछ सरकारी बैंकों को ऊंचे स्तरों पर डॉलर बेचते हुए भी देखा गया। रुपये की लगातार कमजोरी के चलते अब बाजार की नजर डॉलर के मुकाबले 91 के स्तर पर टिकी हुई है। जानकारों का मानना है कि रुपये की इस कमजोरी से आयात लागत बढ़ेगी, जिससे देश में महंगाई और मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ने की आशंका है।