अमेरिका ने भारतीय सामान पर कुल 50% टैरिफ बुधवार से लागू कर दिया है। इसका सीधा असर कपड़ा, रत्न और आभूषण जैसे कई घरेलू उद्योगों पर पड़ने की संभावना है। हालांकि इस चुनौतीपूर्ण स्थिति के बीच बार्कलेज रिसर्च ने अपने हालिया रिपोर्ट में कहा है कि बढ़े हुए टैरिफ के बावजूद भारतीय कॉर्पोरेट क्रेडिट मजबूत बना रहेगा।
बार्कलेज के आंकड़ों के अनुसार भारतीय निर्यात पर ट्रेड वेटेड टैरिफ दर वर्तमान 20.6% से बढ़कर 35.7% हो जाएगी और 27 अगस्त से कुल 50% टैरिफ लागू होगा। यह दर 2025 की शुरुआत में मात्र 2.7% थी। दूसरी ओर, भारत द्वारा अमेरिकी आयात पर लागू टैरिफ केवल 9.4% रहेगा। परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 55 अरब डॉलर का भारतीय निर्यात अब सीधे जोखिम के घेरे में आ गया है, जो अमेरिका को होने वाले कुल शिपमेंट का लगभग 70% है। खासतौर पर इलेक्ट्रिकल मशीनरी, रत्न-आभूषण, कपड़ा और मशीनरी पर सबसे ज्यादा टैरिफ बढ़ाया गया है। हालांकि स्मार्टफोन, पेट्रोलियम उत्पाद और फार्मास्यूटिकल्स इस बढ़ोतरी से फिलहाल बाहर हैं।
निर्यात को लगे इस झटके के बावजूद कॉर्पोरेट ऋण पर असर सीमित रहने का अनुमान है। बार्कलेज के विश्लेषकों का मानना है कि उच्च गुणवत्ता वाले ऋण पर स्प्रेड में अस्थायी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन मजबूत कॉर्पोरेट मूलभूत स्थिति और घरेलू फंडिंग की उपलब्धता लंबी अवधि में जोखिम को नियंत्रित रखेगी।
फिर भी, कुछ निर्यात-आधारित कंपनियों के लिए खतरे बढ़ सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, बायोकॉन बायोलॉजिक्स की आय का 44% हिस्सा अमेरिका से आता है। यदि ट्रम्प के संकेतों के अनुसार फार्मा पर टैरिफ 200% तक बढ़ा दिया गया, तो कंपनी मध्यम से उच्च जोखिम का सामना कर सकती है। इसी तरह, जेएसडब्ल्यू स्टील के अमेरिकी प्लांट्स को मार्जिन पर दबाव झेलना पड़ सकता है, जबकि टाटा स्टील का जोखिम सीमित रहने की संभावना है।