अमेरिका ने भारत से होने वाले टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स और रेडीमेड गारमेंट्स के निर्यात पर अतिरिक्त 50% इंपोर्ट ड्यूटी लगा दी है। इस कदम से भारत के लगभग 11 अरब डॉलर के निर्यात कारोबार को बड़ा झटका लगा है। इसके जवाब में भारत सरकार ने तुरंत नए बाजार तलाशने और निर्यातकों को बचाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
सरकार खास तौर पर ब्रिटेन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में टेक्सटाइल सप्लाई बढ़ाने पर जोर दे रही है। इस मिशन में एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। साथ ही क्वालिटी, टिकाऊपन और इनोवेटिव प्रोडक्ट्स के क्षेत्र में भारत को मजबूत बनाने की दिशा में भी काम शुरू हो गया है। गौरतलब है कि ये तीनों देश मिलकर 590 अरब डॉलर के टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स आयात करते हैं, जो भारत के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
अमेरिका ने 27 अगस्त से टेक्सटाइल पर 6-8% के मूल टैरिफ के अलावा 50% अतिरिक्त टैरिफ लगाने के बाद भारत का निर्यात लगभग ठप हो गया है। ऐसी स्थिति में भारत ने फ्रांस, इटली, स्पेन, नीदरलैंड, पोलैंड, कनाडा, मेक्सिको, रूस, बेल्जियम, तुर्की, यूएई और ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य देशों में एंट्री बढ़ाने की योजना बना ली है। हर बाजार में कितना निर्यात बढ़ाना है इसके लिए लक्ष्य भी तय कर दिए गए हैं।
वर्तमान में भारत दुनिया के 220 देशों में टेक्सटाइल निर्यात करता है, लेकिन इनमें से 40 देश सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन देशों में निर्यात बढ़ाने से भारत के एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो में विविधता आएगी। भले ही अमेरिका में निर्यात बंद होने से 11 अरब डॉलर का झटका लगा हो, लेकिन अन्य देशों के बाजारों पर फोकस करके भारत को नए अवसर खोजने में मदद मिलेगी। इस समय टेक्सटाइल निर्यात में भारत का वैश्विक मार्केट शेयर 4.1% है और भारत छठे स्थान पर है।
वर्ष 2024-25 में दुनिया भर से टेक्सटाइल और एपैरल का कुल 179 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था, जिसमें भारत का बड़ा हिस्सा है। अब एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल बाजारों का विश्लेषण करके यह मार्गदर्शन देगा कि किस देश में किन उत्पादों की ज्यादा मांग है। इसका सीधा फायदा सूरत, पानीपत, तिरुपुर और भदोही के मैन्युफैक्चरर्स को हो सकता है।
इसके साथ ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) भी निर्यात को ज्यादा टिकाऊ बनाने में अहम साबित होगा। ब्रिटेन, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ एफटीए होने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और लंबे समय में टेक्सटाइल निर्यात और मजबूत बनेगा।