अमेरिका के दबाव का असर भारत-रूस तेल व्यापार पर साफ तौर पर देखा जा रहा है। सितंबर महीने में रूस से भारत की कच्चे तेल की आयात मात्रा में गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी दबाव और टैरिफ विवादों के बावजूद रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर बना हुआ है, लेकिन कुल आयात अनुपात में गिरावट देखी गई है। अगस्त की तुलना में रूस से तेल आयात में 10% की कमी आई है, जबकि वर्ष-दर-वर्ष आधार पर यह गिरावट 13% रही। सितंबर में भारत की कुल कच्चे तेल की आयात में रूस का हिस्सा लगभग 34% रहा, जो अप्रैल के 40.25% की तुलना में काफी कम है।
तेल बाजार के सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी दबाव और वैश्विक व्यापार तनाव के कारण भारतीय कंपनियों ने धीरे-धीरे रूस से तेल की खरीद कम की है। हालांकि रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर है, लेकिन वर्ष 2025 के अंत तक इसकी हिस्सेदारी और घटने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई विविधीकरण को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे अन्य स्रोतों की ओर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।