अमेरिका द्वारा भारत के उत्पादों पर ऊँचे टैरिफ लगाने के बाद निर्यातकों ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से ऋण भुगतान में मोरेटोरियम और डॉलर-रुपया के अनुकूल विनिमय दर उपलब्ध कराने की मांग की है।
वर्तमान में अमेरिका ने भारत की निर्यात पर लगभग 50% तक का टैरिफ लगाया है, जिससे जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, फिशरीज़ और केमिकल्स जैसे सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। निर्यातकों की चिंता दूर करने के लिए सरकार कुछ उपायों पर विचार कर रही है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) और RBI अधिकारियों की बैठक में एक साल का ऋण भुगतान मोरेटोरियम और बिना जमानत के क्रेडिट गारंटी स्कीम लागू करने का प्रस्ताव रखा गया। FIEO सूत्रों के अनुसार, यदि कोरोना काल जैसी गारंटी स्कीम निर्यातकों को भी दी जाती है, तो वे व्यापार को पुनर्जीवित कर पाएंगे और डिफॉल्ट की संभावना कम होगी।
निर्यातकों ने यह भी मांग की है कि उन्हें डॉलर स्पॉट प्राइस की बजाय रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) पर बेचने की अनुमति दी जाए। यह दर केवल डॉलर के मुकाबले नहीं बल्कि व्यापारिक देशों की करेंसी की बास्केट और मुद्रास्फीति को ध्यान में रखकर तय होती है। फिलहाल REER डॉलर की मौजूदा दर से लगभग 15% ज्यादा है, जिससे निर्यातकों को ज्यादा रुपये मिल सकते हैं।
बैंक वित्तीय मदद देने को तैयार हैं, हालांकि ऋण भुगतान में सीधी राहत देने में हिचक दिख सकती है। दूसरी ओर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर जल्द ही बातचीत शुरू होने की संभावना है।