जून की तुलना में जुलाई में भारत की कच्चे तेल की आयात 8.70% घटकर 1.85 करोड़ टन पर आ गई, जो पिछले 18 महीनों का सबसे निचला स्तर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2024 के बाद यह सबसे कम आयात है। हालांकि, इसी अवधि में रूस से खरीदारी में इज़ाफा दर्ज किया गया है। दुनिया में भारत कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक और उपभोक्ता देश है। पिछले साल जुलाई की तुलना में भी आयात में 4.30% की गिरावट देखी गई है।
पेट्रोलियम प्लानिंग और एनालिसिस विभाग (PPAC) के अनुसार, पिछले साल जुलाई में भारत ने 1.94 करोड़ टन कच्चा तेल आयात किया था। रूस से बढ़ती खरीद को लेकर अमेरिका लगातार भारत की आलोचना कर रहा है और आयात रोकने का दबाव भी बना रहा है। इसके बावजूद भारतीय ऑयल रिफाइनरीज़ रूस से खरीदारी जारी रखे हुए हैं। हाल ही की एक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में रूस से भारत की कच्चे तेल की दैनिक खरीद बढ़कर 20 लाख बैरल तक पहुंच गई।
अगस्त के पहले पखवाड़े में भारत की औसत दैनिक कच्चे तेल की खरीद 52 लाख बैरल रही, जिसमें से 38% यानी लगभग 20 लाख बैरल रूस से आयात किया गया। भारत पश्चिम एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका जैसे कई क्षेत्रों से कच्चा तेल आयात करता है। युद्ध से पहले रूस से आयात बेहद कम था और कुल आयात का लगभग 80% अन्य देशों से आता था।