भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपने सितंबर बुलेटिन में कहा है कि ऐतिहासिक जीएसटी सुधार आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक रूप से सकारात्मक प्रभाव डालेंगे। ये सुधार Ease of Doing Business को बढ़ावा देंगे और कीमतों में कमी से खपत को मजबूती मिलेगी। 3 सितंबर को हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए गए निर्णय बड़े सुधार साबित होंगे। नए ढाँचे के जरिए आम आदमी की जरूरतों और प्रशासन की सुगमता के बीच संतुलन साधा गया है।
अब अधिकांश आवश्यक वस्तुओं पर शून्य या 5% जीएसटी लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ दरों में सरलता ही नहीं बल्कि ड्यूटी ढाँचे की समस्याओं का भी समाधान किया गया है। पंजीकरण और रिटर्न फाइलिंग को और आसान बनाया गया है, रिफंड तेजी से मिल रहे हैं और लागत में भी कमी आई है। यह विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) तथा स्टार्टअप्स के लिए लाभकारी होगा।
कुल मिलाकर ये सुधार कर संग्रहण बढ़ाएँगे और Ease of Living के साथ-साथ Ease of Doing Business को और मजबूत बनाएँगे। आरबीआई ने आगे कहा कि आने वाले त्योहारी सीजन में यात्री वाहनों का उत्पादन और बिक्री जीएसटी दरों में कटौती से तेजी पकड़ेगा। दुनिया भर में अनिश्चितता बढ़ रही है, खासकर अमेरिका द्वारा नए व्यापार शुल्क लगाने और विकसित देशों की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में पाँच तिमाहियों में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस मजबूती को दर्शाता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है। खुदरा महंगाई (CPI) थोड़ी बढ़ी है लेकिन लगातार सातवें महीने लक्ष्य से नीचे रही है। बैंकिंग प्रणाली में तरलता अधिक है, जिसके चलते ब्याज दर में कटौती का लाभ तेजी से पहुँच रहा है। अप्रैल-जून 2025 की तिमाही में चालू खाते का घाटा घटा है, जो मजबूत सेवा निर्यात और रेमिटेंस आय से संभव हुआ है।