विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत और ईरान के बीच ऐसा कोई “व्यापक समझौता” नहीं है, जिसके तहत भारतीय ध्वज वाले जहाज स्वतः होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकें। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले प्रत्येक जहाज की आवाजाही एक अलग घटना होती है और इसके लिए अलग-अलग स्तर पर बातचीत की जाती है।
ब्रुसेल्स में दिए गए एक साक्षात्कार में जयशंकर ने कहा कि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान के साथ बातचीत जारी है और अब तक इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। उनके अनुसार यह कूटनीतिक प्रयासों का उदाहरण है, जिसके माध्यम से संवेदनशील परिस्थितियों में भी समाधान निकाला जा सकता है।
विदेश मंत्री के अनुसार हाल ही में दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी वाहक जहाज इस जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार करने में सफल रहे हैं। इन जहाजों में लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लदा हुआ है और वे भारत के बंदरगाहों की ओर रवाना हो चुके हैं। इनमें से एक जहाज के मुंद्रा बंदरगाह और दूसरे के कांडला बंदरगाह पहुंचने का कार्यक्रम तय किया गया है।
जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं और उन्हीं संबंधों के आधार पर यह संवाद आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि इस व्यवस्था के बदले में ईरान को किसी प्रकार का विशेष लाभ दिया गया है। उनके अनुसार यह किसी प्रकार का लेन-देन नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और संवाद का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि अभी भी कई भारतीय जहाज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं और उनके सुरक्षित पारगमन को लेकर भी बातचीत जारी है। भारत इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।
विदेश मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अन्य देशों से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखने के लिए अमेरिकी प्रयासों में सहयोग देने और युद्धपोत भेजने की अपील की थी। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ा है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
जयशंकर ने कहा कि भारत का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में टकराव के बजाय संवाद और समन्वय के माध्यम से समाधान निकालना अधिक प्रभावी होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अन्य देश भी इस दिशा में बातचीत के प्रयास करते हैं, तो इससे वैश्विक स्तर पर स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
इसी बीच ईरान ने भी क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए ब्रिक्स समूह से रचनात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया है। भारत फिलहाल इस समूह की अध्यक्षता कर रहा है और संघर्ष को लेकर सदस्य देशों के बीच साझा दृष्टिकोण बनाने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, क्योंकि दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। मौजूदा तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों पर भी दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।