विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की आपातकालीन वर्चुअल बैठक में भाग लिया। इस दौरान जयशंकर ने कहा कि व्यापार नीति निष्पक्ष, पारदर्शी और सभी के लिए लाभकारी होनी चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बिना जयशंकर ने कहा कि समस्याएँ पैदा करने और लेन-देन को मुश्किल बनाने से कोई फ़ायदा नहीं होगा। व्यापार हमेशा आसान होना चाहिए।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा भी इस वर्चुअल शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। इससे पहले, ऐसी खबरें थीं कि प्रधानमंत्री मोदी भी इस बैठक में शामिल होंगे।
इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य अमेरिकी टैरिफ नीतियों से उत्पन्न व्यापार चुनौतियों पर चर्चा करना था। अमेरिका ने भारत और ब्राज़ील जैसे देशों पर 50% तक टैरिफ लगाया है। ब्रिक्स 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की 3 तस्वीरें

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने वर्चुअल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन बुलाया।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य नेताओं ने शिखर सम्मेलन में भाग लिया।

प्रधानमंत्री मोदी की जगह विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वर्चुअल शिखर सम्मेलन को संबोधित किया।
जिनपिंग बोले- ट्रंप की चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट हों
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका की व्यापारिक चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुटता का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, “कुछ देशों द्वारा शुरू किए गए व्यापार युद्ध और टैरिफ युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं और नियमों को कमजोर कर रहे हैं।”
एस जयशंकर की 4 बड़ी बातें…
- आपूर्ति श्रृंखला मज़बूत होनी चाहिए: जब भी कोई संकट आता है, तो वस्तुओं की कमी हो जाती है। इसे रोकने के लिए देशों को आपसी सहयोग बढ़ाना होगा। एक मज़बूत और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला बनानी होगी ताकि सामान समय पर पहुँच सके।
- व्यापार घाटे का समाधान ज़रूरी: ब्रिक्स देशों, खासकर चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा सबसे ज़्यादा है। इस समस्या का जल्द समाधान ज़रूरी है ताकि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार संतुलित और सभी के लिए फ़ायदेमंद बना रहे।
- वैश्विक संकटों में बड़े संगठन विफल: पूरी दुनिया कोरोना, युद्ध और जलवायु संकट से परेशान है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े संगठन इन समस्याओं का समाधान करने में विफल रहे हैं। इसलिए इन संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है।
- व्यापार को राजनीति से जोड़ना उचित नहीं: व्यापार को राजनीति या गैर-व्यापारिक मामलों से जोड़ना लाभदायक नहीं है। ब्रिक्स देशों को आपसी व्यापार की समीक्षा करनी चाहिए।
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता करेगा
भारत 2026 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा। 1 जनवरी, 2026 से यह ज़िम्मेदारी ब्राज़ील से भारत को सौंप दी जाएगी। मोदी ने 2025 में रियो डी जेनेरियो में होने वाले 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत की योजनाओं को साझा किया। भारत का लक्ष्य ब्रिक्स का एक नया स्वरूप प्रस्तुत करना है जो निम्नलिखित पर केंद्रित होगा:
- मानवता सर्वप्रथम: भारत ब्रिक्स को एक ऐसा मंच बनाएगा जो लोगों के हितों को प्राथमिकता देगा, जैसा कि उसने जी-20 की अध्यक्षता के दौरान किया था।
- लचीलापन और नवाचार: भारत वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए नई प्रौद्योगिकियों और सहयोग पर ध्यान केंद्रित करेगा।
- सतत विकास: जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा।
- वैश्विक दक्षिण की आवाज: भारत विकासशील देशों के हितों को बढ़ावा देगा तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, आईएमएफ और विश्व बैंक जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग करेगा।
- आतंकवाद-रोधी उपाय और आर्थिक सुदृढ़ीकरण: भारत आतंकवाद-रोधी उपायों और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर देगा।