विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPI) की तुलना में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की हिस्सेदारी भारतीय शेयर बाजार में लगातार बढ़ रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर तिमाही के अंत में एनएसई सूचीबद्ध कंपनियों में डीआईआई की हिस्सेदारी 44 बेसिस पॉइंट बढ़कर 18.25% हो गई, जबकि एफपीआई की हिस्सेदारी 34 बेसिस पॉइंट घटकर 16.70% रह गई।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, डीआईआई की बढ़त का मुख्य कारण खुदरा निवेशकों द्वारा म्यूचुअल फंडों में लगातार निवेश है। SIP के माध्यम से बढ़ता निवेश घरेलू संस्थाओं को मजबूत बना रहा है। वहीं, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ऊंचे मूल्यांकन के कारण विदेशी निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं।
सितंबर तिमाही में म्यूचुअल फंडों की हिस्सेदारी 10.90% तक पहुंच गई, जो जून में 10.56% थी। इस दौरान एफपीआई ने ₹1.02 लाख करोड़ के शेयर बेचे, जबकि डीआईआई ने ₹2.20 लाख करोड़ की खरीदारी की। दिसंबर 2020 से एफपीआई का होल्डिंग अनुपात लगातार घटकर अब 16.70% पर आ गया है। विदेशी बिकवाली के बावजूद, भारतीय बाजार खुदरा और घरेलू निवेशकों के समर्थन से स्थिर बने हुए हैं।