सितंबर महीने में भारत के सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में कुछ सुस्ती दर्ज की गई है। एसएंडपी ग्लोबल द्वारा तैयार एचएसबीसी सर्विस पीएमआई अगस्त के 62.90 की तुलना में घटकर 60.90 पर आ गया। निर्यात और व्यापार गतिविधियों में मंदी के साथ-साथ नए ऑर्डर और रोजगार वृद्धि में धीमापन इसका मुख्य कारण रहा। हालांकि, लगातार चौथे महीने पीएमआई 60 से ऊपर रहा, जो बताता है कि सेवा क्षेत्र अब भी विस्तार के दायरे में है। उल्लेखनीय है कि अगस्त का सूचकांक पिछले 15 वर्षों के उच्चतम स्तर पर था। आम तौर पर पीएमआई 50 से ऊपर होने का अर्थ है कि संबंधित क्षेत्र में विस्तार हो रहा है, जबकि 50 से नीचे का आंकड़ा संकुचन का संकेत देता है।
रिपोर्ट के अनुसार, नए ऑर्डर, निर्यात और रोजगार वृद्धि में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन कुल मिलाकर व्यावसायिक स्थिति अब भी अनुकूल बनी हुई है। अमेरिका द्वारा अगस्त से लागू किए गए टैरिफ के बावजूद सेवा क्षेत्र की वृद्धि पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। कंपनियों में भविष्य के व्यापार को लेकर आशावाद कायम है। सेवा क्षेत्र का “भविष्य गतिविधि सूचकांक” मार्च के बाद अपने उच्चतम स्तर पर बना हुआ है, जो संकेत देता है कि कंपनियां आने वाले महीनों में कारोबार बढ़ने की उम्मीद कर रही हैं।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार धीमा है और निर्यात वृद्धि दर मार्च के बाद के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। सेवाओं के दाम वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी न रहने से नए ऑर्डरों में वृद्धि सीमित रही। रोजगार क्षेत्र में भी वृद्धि की रफ्तार धीमी रही — सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों में से 5% से भी कम ने नए कर्मचारियों की भर्ती की है। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह जारी विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) पीएमआई में भी गिरावट देखी गई थी — अगस्त में 59.30 से घटकर सितंबर में 57.70 पर आ गया, जो पिछले चार महीनों का निचला स्तर है।