चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में देश के ऋणदाता अधिक सुरक्षित ऋण की ओर झुकाव दिखा रहे हैं। जोखिम प्रबंधन और एसेट क्वॉलिटी प्राथमिकता बनते ही बैंकों और एनबीएफसी ने अनसिक्योर्ड लोन की तुलना में सुरक्षित ऋण और परिचित उधारकर्ताओं को लोन देने को अधिक तरजीह दी है। इस नीति के परिणामस्वरूप रिटेल लोन सेगमेंट में सबसे अधिक वृद्धि गोल्ड लोन में दर्ज की गई है। सितंबर तिमाही में गोल्ड लोन वार्षिक आधार पर 35.80% बढ़कर 14.50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि तिमाही आधार पर 8.60% की वृद्धि दर्ज हुई है। गोल्ड लोन में एसेट क्वॉलिटी में सुधार देखा गया है क्योंकि इसमें पर्याप्त कोलेट्रल सुरक्षा मौजूद होती है और लोन मानदंड भी अधिक सख्त किए गए हैं।
अनसिक्योर्ड लोन पर सख्ती बढ़ने से व्यक्ति और छोटे व्यापारी भी गोल्ड के बदले लोन लेना अधिक पसंद कर रहे हैं। इसी अवधि में होम लोन में भी वृद्धि देखने को मिली है। सितंबर तिमाही में होम लोन वार्षिक आधार पर 11.10% बढ़कर 42.10 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जबकि तिमाही आधार पर 2.10% की वृद्धि हुई है। दूसरी ओर, ऋणदाता नए उधारकर्ताओं को लोन देने में अधिक चयनात्मक हो गए हैं, जिसके कारण अनसिक्योर्ड लोन और नए उधारकर्ताओं के ऋण में कमी देखी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार ऋणदाता जोखिम कम और सुरक्षित वृद्धि पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।