जुमे की नमाज़ के बाद बरेली में भड़की हिंसा पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्ती का ऐलान किया; पुलिस एक्शन, गिरफ्तारियां और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सुर्खियों में
उत्तर प्रदेश के बरेली में जुमे की नमाज़ के बाद हुई हिंसा पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर कोई रहम नहीं होगा और जो सबक दिया गया है, उसे देखकर आगे की पीढ़ियां दंगा करने से पहले दो बार सोचेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो नाकाबंदी होगी और न ही कर्फ्यू लगाया जाएगा, बल्कि कानून के मुताबिक कठोर कार्रवाई की जाएगी।
क्या हुआ था बरेली में
- जुमे की नमाज़ के बाद शहर के संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में लोग ‘I Love Muhammad’ पोस्टर-बैनर के साथ निकल आए, जिसके बाद कुछ स्थानों पर नारेबाजी से माहौल तनावपूर्ण हो गया।
- स्थिति बिगड़ने पर भीड़ के कुछ तत्वों ने पथराव और तोड़फोड़ की, जिससे कई वाहन और दुकानों को नुकसान पहुंचा और पुलिसबल को बल प्रयोग करना पड़ा।
- पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और फ्लैग मार्च के ज़रिए भीड़ को तितर-बितर किया, जबकि वीडियो-सीसीटीवी फुटेज से पहचान की कवायद शुरू की गई।
CM योगी का बयान
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “एक मौलाना भूल गया कि राज्य में सत्ता किसकी है,” और यह भी कि “व्यवस्था रोकने” की सोच पर कठोर जवाब दिया जाएगा।
- उन्होंने निर्देश दिए कि त्योहारों/जुलूसों के नाम पर कानून-व्यवस्था भंग करने की किसी भी साजिश पर जीरो टॉलरेंस रहे, और “किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”
- योगी ने दावा किया कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में कर्फ्यू तक नहीं लगने दिया गया और विकास की कहानी कानून-व्यवस्था की मजबूती से ही शुरू होती है।
पुलिस एक्शन और जांच
- शुरुआती चरण में बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया, कई एफआईआर दर्ज की गईं और नामजद-अनाम आरोपियों की तलाश जारी है।
- इंटेलिजेंस इनपुट, ड्रोन/सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग से पत्थरबाज़ी-उपद्रव में शामिल चेहरों की पहचान की जा रही है।
- प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त फोर्स, रैपिड एक्शन/पीएसी की तैनाती और रूट फ्लैगिंग के साथ शांति बैठकें शुरू कर दी हैं।
मौलाना और संगठनों पर निगरानी
- इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल से जुड़े नामों पर पुलिस की निगाह है; पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।
- प्रशासन ने परमिट/अनुमति रद्द होने के बाद भीड़ जुटाने के प्रयासों को गंभीर उल्लंघन माना और आयोजकों की जवाबदेही तय करने की बात कही है।
- उकसाऊ बयान/पोस्ट करने वालों पर आईटी एक्ट व अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की तैयारी बताई गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
- विपक्षी दलों ने लाठीचार्ज और पुलिस सख्ती पर सवाल उठाए, पारदर्शी जांच और जवाबदेही की मांग की।
- सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों से तीखी टिप्पणियां सामने आईं; सियासी वार-पलटवार के बीच शांति-अपीलें भी जारी की गईं।
- जाति-आधारित बैठकों/रैलियों पर हालिया सरकारी प्रतिबंध के फैसले को लेकर सहयोगी दलों की असहमति ने राजनीतिक तापमान बढ़ाया है।
स्थानीय हालात और प्रशासनिक कदम
- शहर के कई बाजारों में अस्थायी तौर पर दुकानें बंद रहीं, बस रूट डाइवर्जन और अतिरिक्त पुलिस तैनाती से हालात सामान्य करने की कोशिश हुई।
- अफवाहों को रोकने के लिए पुलिस ने लगातार घोषणाएं, सोशल मीडिया एडवाइजरी और फेक न्यूज़ के खिलाफ चेतावनी जारी की।
- जिला प्रशासन ने शांति समितियों के साथ समन्वय बढ़ाया, दोनों समुदायों के प्रबुद्ध जनों के साथ बैठकें कीं और भरोसा बहाली के कदम तेज किए।
क्या आगे
- नामज़द-अनाम सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और चार्जशीटिंग पर फोकस रहेगा; नुकसान का आकलन कर वसूली/रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।
- संवेदनशील इलाकों में दीर्घकालिक निगरानी, कैमरा कवरेज विस्तार और इंटेल-समन्वय के जरिए पुनरावृत्ति रोकने की योजना पर काम होगा।
- कानून-व्यवस्था पर “जीरो टॉलरेंस” की सरकार की लाइन जारी रहेगी, जबकि विपक्ष स्वतंत्र जांच और मानवाधिकार मानकों के पालन पर दबाव बनाए रखेगा।