इंडियन स्टॉक मार्केट इस समय तेज़ी के अपने गोल्डन पीरियड से गुज़र रहा है। कल के अच्छे क्लोज के बाद, आज 10 फरवरी को निफ्टी 26,000 के साइकोलॉजिकल लेवल को छूने की तरफ़ मज़बूत कदम बढ़ा चुका है।
मार्केट में ‘बुल्स’ का दबदबा इतना मज़बूत है कि मार्केट छोटी-बड़ी प्रॉफ़िट बुकिंग को आसानी से पचा रहा है। खासकर, RBI के रेपो रेट को 5.25% पर बिना बदलाव के रखने और GDP ग्रोथ का अनुमान 7.4% रखने की ख़बर से इन्वेस्टर्स में काफ़ी भरोसा है।
अगर मार्केट की अंदरूनी मज़बूती यानी एडवांस-डिक्लाइन रेशियो देखें, तो आज कुल 4,450 स्क्रिप्स में से 2,100 बढ़ रहे हैं और 1,850 घट रहे हैं, जबकि बाकी फ़्लैट हैं। यह डेटा बताता है कि तेज़ी सिर्फ़ इंडेक्स तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी का माहौल है।
अगर मार्केट में तेज़ी के मुख्य कारणों पर नज़र डालें…
RBI की लिबरल पॉलिसी: इंटरेस्ट रेट न बढ़ाने से कॉर्पोरेट वर्ल्ड को राहत मिली है, जिससे सीधे तौर पर प्रॉफिट बढ़ेगा।
इंडिया-US ट्रेड डील: यह ऐतिहासिक ट्रेड डील एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स के लिए ‘बूस्टर डोज़’ साबित हो रही है। टैरिफ कम होने की उम्मीद में इन्वेस्टमेंट बढ़ा है, खासकर टेक्सटाइल और IT सेक्टर्स में, और साथ ही मार्केट्स में भी तेज़ी है।
मज़बूत फॉरेन इन्वेस्टमेंट (FIIs): चूंकि इंडिया ग्लोबली एक स्टेबल इकॉनमी है, इसलिए फॉरेन फंड्स धीरे-धीरे स्टॉक-स्पेसिफिक स्टॉक्स में लगाए जा रहे हैं।
स्टेबल रुपया: डॉलर के मुकाबले रुपया 90.60 पर मज़बूत बना हुआ है, जिससे इंपोर्टर्स की कॉस्ट कम हुई है और इन्वेस्टर्स का भरोसा बढ़ा है।
मंदी के चेतावनी के संकेत और संभावित कारण –
मार्केट में तेज़ी होने के बावजूद, कुछ बातों पर नज़र रखना ज़रूरी है:
CPI महंगाई के आंकड़े:
अगर 12 फरवरी को जारी होने वाले महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज़्यादा आते हैं, तो मार्केट में कुछ समय के लिए गिरावट आ सकती है और मिड-कैप, स्मॉल-कैप और लार्ज-कैप स्टॉक्स में बिकवाली का दबाव देखा जा सकता है।
जियो-पॉलिटिकल तनाव: रूस-यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में बढ़ती अस्थिरता कभी भी ग्लोबल सेंटिमेंट खराब कर सकती है, इसलिए निवेशकों को सावधान रहना चाहिए और धीरे-धीरे प्रॉफ़िट बुक करना चाहिए।
ओवरबॉट पोज़िशन:
क्योंकि कुछ लार्ज-कैप स्क्रिप्स टेक्निकली ‘ओवरबॉट’ हैं, इसलिए बड़ी प्रॉफ़िट बुकिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
कमोडिटी – क्रूड ऑयल मूवमेंट –
इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल अभी मिला-जुला रिस्पॉन्स दे रहा है। चूंकि भारत अपनी ज़्यादातर क्रूड ऑयल की ज़रूरतें इंपोर्ट करता है, इसलिए इसकी कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। रूस से क्रूड ऑयल की रियायती दर मिलने की वजह से भारत का फिस्कल डेफिसिट अभी कंट्रोल में है। हालांकि, OPEC देशों द्वारा प्रोडक्शन में कटौती की घोषणा भारत के लिए चिंता की बात हो सकती है। फिलहाल, कच्चे तेल की स्थिरता बाजार के लिए पॉजिटिव है।
टेक्निकल व्यू और स्टॉक स्पेसिफिक एनालिसिस :-
निफ्टी फ्यूचर: 25808 एक बहुत मजबूत सपोर्ट है। 26006 के ऊपर, यह 26066 – 26202 का बुलिश लेवल दर्ज कर सकता है।
- टेक महिंद्रा (1615): 1590 रुपये के सपोर्ट से, इसे 1634 से 1640 रुपये के टारगेट के लिए पॉजिटिव माना जा सकता है।
- HCL टेक (1590): 1570 रुपये के साथ 1618 रुपये के स्टॉप लॉस पर कीमत पर विचार किया जा सकता है।
- टाटा कंज्यूमर (1167): 1140 रुपये से 1199 रुपये की रेंज में सपोर्ट संभव है।
भविष्य की दिशा –
शॉर्ट टर्म में मार्केट में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन भारत की 7.4% की GDP ग्रोथ लॉन्ग टर्म में वेल्थ क्रिएशन में मदद करेगी। इन्वेस्टर्स के लिए, अभी ‘डिप्स पर खरीदें’ यानी SIP के ज़रिए अच्छी क्वालिटी वाले स्टॉक्स में इन्वेस्ट करने का सबसे अच्छा मौका है।
निखिल भट्ट
बिज़नेस एडिटर
इन्वेस्टमेंट पॉइंट
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