पूंजी बाजार नियामक सेबी ने IPO लाने वाली बड़ी कंपनियों के लिए न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी (MPS) से जुड़े नियमों में छूट दी है। अब 5,00,000 करोड़ रुपये से अधिक मार्केट कैप वाली कंपनियों को लिस्टिंग के बाद केवल 2.5% हिस्सेदारी ही जनता को बेचनी होगी, जबकि पहले यह सीमा 5% थी। साथ ही सॉवरेन-समर्थित और विदेशी रिटेल फंड्स के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू किया गया है, जिससे वे आसानी से भारतीय बाजार में प्रवेश कर सकें।
संशोधित नियमों के तहत छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के लिए मौजूदा MPO/MPS नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा। लेकिन 50,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ के बीच मार्केट कैप वाली कंपनियों को 6,250 करोड़ रुपये का MPO लाना होगा और कम से कम 2.75% सार्वजनिक हिस्सेदारी देनी होगी। सबसे बड़ी कंपनियों के लिए 15,000 करोड़ रुपये का MPO और न्यूनतम 2.5% सार्वजनिक हिस्सेदारी अनिवार्य होगी। यदि लिस्टिंग के समय सार्वजनिक हिस्सेदारी 15% से कम है तो इसे पाँच साल में 15% और दस साल में 25% तक बढ़ाना होगा।
SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे के अनुसार ये बदलाव बड़ी कंपनियों को IPO में हिस्सेदारी कम करने की कठिनाई से राहत देंगे और बाजार में पर्याप्त तरलता एवं रिटेल निवेशकों के लिए शेयर उपलब्ध कराएंगे। IPO में रिटेल निवेशकों के लिए 35% आरक्षण पहले जैसा ही रहेगा, जबकि म्यूचुअल फंड्स के लिए अंडर-सब्सक्रिप्शन स्पिलओवर की अनुमति दी गई है।