वर्ष 2008 के बाद 2025 में सबसे अधिक ओपन ऑफर्स दर्ज किए गए हैं, जो मर्जर और एक्विजिशन (M&A) गतिविधियों में तेज वृद्धि को दर्शाते हैं। मुख्य रूप से प्राइवेट इक्विटी फर्मों की बढ़ती सक्रियता के चलते इस वर्ष ओपन ऑफर्स की संख्या 121 रही, जो पिछले 17 वर्षों में सबसे अधिक और 1997 के बाद दूसरी सबसे ऊंची संख्या है। इससे पहले 2008 में 133 ओपन ऑफर्स दर्ज हुए थे। यह आंकड़ा बताता है कि 2025 M&A गतिविधियों के लिए बेहद सक्रिय वर्ष रहा, जिसमें औसतन हर सप्ताह दो ओपन ऑफर्स देखने को मिले।
मूल्य के लिहाज से 2025 में कुल ₹41,443.95 करोड़ के ओपन ऑफर्स आए, जो इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले 2013 में ₹47,473.77 करोड़ और 2022 में ₹45,649.39 करोड़ के ओपन ऑफर्स दर्ज किए गए थे। आमतौर पर ओपन ऑफर तब आता है जब कोई कंपनी एक साल में 5% से अधिक हिस्सेदारी हासिल करती है, कुल 25% तक हिस्सेदारी लेती है या कंपनी के नियंत्रण में बदलाव होता है। अधिकतर मामलों में खरीदार कम से कम अतिरिक्त 26% हिस्सेदारी लेने की कोशिश करता है, ताकि सार्वजनिक शेयरधारकों को एग्जिट का मौका मिल सके।
2025 के प्रमुख ओपन ऑफर्स में टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स द्वारा जेबी केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स के लिए ₹6,842.80 करोड़, CVC कैपिटल की इकाई एक्विलो हाउस द्वारा आवास फाइनेंस के लिए ₹3,682.15 करोड़ और IHH हेल्थकेयर द्वारा फोर्टिस हेल्थकेयर के लिए ₹3,349.44 करोड़ की पेशकश शामिल है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत अर्थव्यवस्था के दौरान M&A गतिविधियां तेज होती हैं और हाल के वर्षों में प्राइवेट इक्विटी फर्म्स नियंत्रणकारी हिस्सेदारी की तलाश में अधिक सक्रिय हुई हैं।