दिसंबर महीने में रूसी क्रूड तेल की आयात तीन साल के निचले स्तर पर पहुंचने की संभावना है, क्योंकि पश्चिमी देशों की बढ़ती सख्ती के चलते भारत के लिए रूसी क्रूड खरीदना कठिन हो गया है। 21 नवंबर से रूस की दो प्रमुख तेल सप्लायर्स पर लगे प्रतिबंधों के बाद दिसंबर सहित आने वाले महीनों में भारत की रूसी क्रूड खरीद में उल्लेखनीय गिरावट देखी जा सकती है
नवंबर में कई महीनों की ऊँचाई पर पहुंची आयात दिसंबर में भारी गिरावट के साथ 18.70 लाख बैरल प्रति दिन से घटकर केवल 6–6.50 लाख बैरल प्रति दिन रह सकती है। प्रतिबंधों के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रोसनेफ्त और लुकऑयल जैसी प्रमुख रूसी कंपनियों के साथ कोई नया करार नहीं किया है, और दिसंबर डिलीवरी के लिए पाँच बड़ी रिफाइनरियों ने कोई अनुबंध नहीं किया है।
पश्चिमी देशों द्वारा बैंकिंग ट्रांजैक्शनों पर कड़ी निगरानी के चलते भारतीय खरीदार सतर्क होकर अन्य देशों से सप्लाई लेने की ओर बढ़ रहे हैं। अक्टूबर में रूस से भारत का क्रूड आयात 16.5 लाख बैरल प्रतिदिन रहा था, जबकि अमेरिकी क्रूड का हिस्सा जून 2024 के बाद उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। भारत में अमेरिकी टैरिफ 50% लगने से वहाँ से खरीद पर भी दबाव बढ़ा है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी क्रूड सस्ता मिलने पर भारत उसका सबसे बड़ा बाजार बन गया था, लेकिन हालिया प्रतिबंधों के बाद यह रुझान तेज़ी से बदल रहा है।