भारत सरकार ने जीएसटी में किए गए सुधारों को लेकर दावा किया है कि इनसे देश की अर्थव्यवस्था को लगभग 20 लाख करोड़ रुपये का फायदा होगा। नया जीएसटी ढाँचा 22 सितंबर से लागू होगा, जिसमें आम उपभोक्ता को अब केवल दो ही दरें – 5% और 18% – चुकानी होंगी। लग्ज़री उत्पादों के लिए अतिरिक्त 40% स्लैब की व्यवस्था भी की गई है। हालाँकि, इस ऐतिहासिक सुधार के चलते केंद्र सरकार को करीब 48 हजार करोड़ रुपये के राजस्व घाटे की आशंका भी जताई गई है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस सुधार से देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ होगा। उनके अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था मुख्यतः उपभोग आधारित है और जीडीपी में उपभोग का हिस्सा 61% से अधिक है। वर्तमान में देश का जीडीपी लगभग 330 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से 202 लाख करोड़ रुपये उपभोग से आते हैं। वैष्णव का तर्क था कि यदि उपभोग में केवल 10% की भी वृद्धि होती है तो जीडीपी में 20 लाख करोड़ रुपये तक का इज़ाफ़ा हो सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जीएसटी में किए गए सुधारों का अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ़ से कोई संबंध नहीं है। इस तैयारी की शुरुआत लगभग डेढ़ साल पहले हुई थी और यह प्रधानमंत्री मोदी के “सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन” के लक्ष्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वैष्णव ने कहा कि नया जीएसटी ढाँचा भारत की परिवर्तन यात्रा की एक नई शुरुआत साबित होगा।