महीनों की अनिश्चितता, ज़्यादा टैरिफ़ और ग्लोबल तनाव के बाद, भारत और US के बीच ट्रेड डील ने मार्केट की दिशा बदल दी है। टैरिफ़ में बड़ी कमी और बेहतर मार्केट एक्सेस ने न सिर्फ़ बिज़नेस को राहत दी है, बल्कि 2026 के लिए भारतीय इकोनॉमिक ग्रोथ की उम्मीदें भी बढ़ाई हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह एग्रीमेंट भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में एक मज़बूत प्लेयर बना सकता है।
इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स ने इस ट्रेड डील को बहुत ज़रूरी बताया है। उन्होंने कहा कि भारत-US एग्रीमेंट दुनिया की सबसे ज़रूरी इकोनॉमिक पार्टनरशिप में से एक को नई ताकत देता है और इन्वेस्टर का भरोसा मज़बूत करेगा। इस एग्रीमेंट ने मार्केट एक्सेस को आसान बनाया है और पॉलिसी कन्फ्यूजन को दूर किया है।
जब नियम साफ़ होते हैं, तो कैपिटल इन्वेस्टमेंट तेज़ी से बढ़ता है, और यही इस डील की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने आगे कहा कि मज़बूत बाइलेटरल ट्रेड से भारत और US के बीच कैपिटल फ्लो बढ़ेगा। इससे विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर की भागीदारी बढ़ेगी और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारतीय कंपनियों की भूमिका और गहरी होगी।
टैरिफ में लगभग 50 परसेंट से लगभग 18 परसेंट की कमी मार्केट की उम्मीदों से कहीं ज़्यादा है। यह कमी इन्वेस्टर के लिए अच्छी खबर है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मज़बूत ट्रेड और कैपिटल फ्लो मीडियम टर्म में रुपये को सपोर्ट करेंगे और स्टॉक मार्केट, खासकर एक्सपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े सेक्टर्स के लिए भी पॉजिटिव माहौल बनाएंगे।
यह डील, हाल ही में हुए इंडिया-यूरोपियन यूनियन ट्रेड एग्रीमेंट के साथ मिलकर, 2026 में इंडियन इकोनॉमी के लिए सबसे मज़बूत एक्सटर्नल ग्रोथ सपोर्ट में से एक साबित हो सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, US और यूरोप दोनों के साथ मज़बूत ट्रेड रिलेशन साफ तौर पर दिखाते हैं कि इंडिया अब ग्लोबल इकोनॉमी में ज़्यादा कॉन्फिडेंस और मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है।
Nikhil Bhatt
Business Editor
Investment Point
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