पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिससे भारत में एलपीजी की कमी को लेकर चिंता बढ़ गई है। अनियमित आपूर्ति और कीमतों में बढ़ोतरी के चलते दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे शहरों में घरों और व्यवसायों पर इसका असर दिखाई देने लगा है।
दिल्ली के कई स्कूल और कॉलेज कैंटीनों ने एलपीजी की कमी के कारण अपने मेनू में कटौती शुरू कर दी है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की एक कैंटीन ने नाश्ता बंद करने का फैसला किया है और केवल चाय ही परोसने की तैयारी में है। वहीं कुछ अन्य कैंटीनों ने भी कई लोकप्रिय व्यंजन मेनू से हटा दिए हैं।
मुंबई में एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए लोगों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है। कई परिवारों को सिलेंडर प्राप्त करने के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। पुणे में मेस संचालकों को सिलेंडर मिलने में परेशानी हो रही है, जिसके कारण भोजन की कीमतें बढ़ रही हैं और कई छात्र खर्च कम करने के लिए एक ही टिफिन साझा करने लगे हैं।
बेंगलुरु में ऑटो चालकों ने एलपीजी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की शिकायत की है, जिससे उनकी लागत बढ़ गई है। वहीं कोलकाता और अजमेर में कई होटल और रेस्तरां एलपीजी की कमी के कारण लकड़ी और कोयले जैसे पारंपरिक ईंधन का इस्तेमाल करने लगे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहा तो आने वाले समय में भारत में एलपीजी की आपूर्ति पर और दबाव बढ़ सकता है, जिससे आम लोगों और छोटे व्यवसायों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है।