वैश्विक उभरते बाज़ारों में निवेश करने वाले फंड पिछले कुछ समय से भारत से धीरे-धीरे बाहर निकल रहे हैं। अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ के कारण कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर दबाव बढ़ने की आशंका ने फंड हाउसों का भरोसा कमजोर कर दिया है। नतीजतन, निवेशक भारत की बजाय चीन, दक्षिण कोरिया और हांगकांग जैसे अन्य उभरते बाज़ारों में अधिक पूंजी निवेश कर रहे हैं।
नोमुरा के विश्लेषण के अनुसार, जुलाई महीने में भारत के लिए आवंटन में 1.10% की कमी दर्ज की गई, जबकि हांगकांग, दक्षिण कोरिया और चीन की इक्विटी में क्रमशः 80, 40 और 70 बेसिस पॉइंट का इज़ाफ़ा हुआ। भारत से निवेश घटाने वाले फंडों की संख्या 41 रही, जबकि हांगकांग और चीन में 37 तथा दक्षिण कोरिया में 29 फंडों ने अपने निवेश में बढ़ोतरी की।
जुलाई के अंत तक 71% फंडों के लिए भारत अंडरवेट रहा, जो जून के अंत में 60% था। दूसरी ओर, हांगकांग और चीन को अंडरवेट मानने वाले फंडों का प्रतिशत 71 से घटकर 53% पर आ गया। जुलाई का महीना फंड मैनेजरों के लिए कठिन साबित हुआ। उभरते बाज़ारों के 45 में से केवल 7 फंडों ने ही MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया।
इससे पहले, बैंक ऑफ अमेरिका के एक सर्वे में भी सामने आया था कि निवेशकों की पसंद की सूची में भारत अब सबसे नीचे पहुँच गया है, जबकि मई महीने में यह शीर्ष पर था।